Sunday, December 19, 2010

काव्य-पाठ


मार्गशीर्ष शु. १४
वि.सं. २०६७
    


                         || भारत भूमि नमोस्तुते || 
   
उच्च  हिमालय पर्वत जिसका, शीष मुकुट  गौरवशाली,
श्री चरणों में नीर चढ़ाता, रत्नाकर मंगलकारी,
वीरों, देवों की धरती ये, माता सबकी सुखकारी,
जण गण मन में बसने वाली, भारत भूमि नमोस्तुते |

सिंचित जो गंगा, कावेरी, यमुना, कृष्णा नदियों से,
जप-तप, ध्यान, ज्ञान-योग से परिपूरित जो सदियों से, 
वृक्ष,वनों, धन-धान्य,अन्न, फल-फूल बगीचे कलियों से, 
रत्नों,मणियों से मंडित ये, भारत भूमि नमोस्तुते | 

कृष्ण,राम,बलराम,लखन सब, बालक जिसके आँगन के, 
नानक,अर्जुन,कर्ण,बुद्ध सब,सुमन है जिसके उपवन के, 
लक्ष्मीबाई, वीर शिवाजी, राणा जिसका यौवन है,
महावीर की तपोभूमि श्री, भारत भूमि नमोस्तुते |

पर्व महा गणतंत्र आज है, उठो देश का गान करो,  
बिन मांगे सब देने वाली, "माँ" का कुछ कल्याण करो, 
विश्व-विजय करने से उत्तम, आत्म विजय की ओर बढ़ो, 
'ऋषिराज'  के वन्दन शत्-शत्, भारत भूमि नमोस्तुते ||

ऋषिराज वोरा 
सतना (म.प्र.)

No comments:

Post a Comment